Archive | May 2015

आ ॰ ॰ चल उठ जा मेरी पुकार पे

आ ॰ ॰ चल उठ जा मेरी पुकार पे,
कमी ना रहे कोई तेरे श्रंगार में,,

विरह रोए ऐसे, मिलन गाए ऐसे,
बरसों के बाद छाएं हो मेघ जैसे,,

थिरकन पे तेरी गगन झूम जाए,
ना दिन ही ढले, ना रात होने पाए,,
(विवेक राजपूत) Vivek Rajpoot

Vivek Rajpoot

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