Archive | September 2012

योग सार्थक है तभी, जब द्वैत एकाकार हो,

योग सार्थक है तभी,

जब द्वैत एकाकार हो,

मैं रहूँ या ना रहूँ,
तुमको मुझसे प्यार हो,,

hindi poety by vivek rajpoot, Hindi poet

हिन्दी कविता, द्वारा विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

A Collection Hindi Poems, Hindi Geet, Hindi Poetry, Shayari & Ghazals

by – Vivek Rajpoot, Hindi Poet

 हिन्दी कविता, हिन्दी काव्य, हिन्दी गीत, शायरी व गज़लों का संग्रह

 द्वारा – विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

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