Archive | March 2012

मुहब्बत के जमाने थे, मुहब्बत के जमाने हैं।।

नया ये दौर है लेकिन, वही किस्से पुराने हैं।

मुहब्बत के जमाने थे, मुहब्बत के जमाने हैं।।

मेरे गीतों में जो तुमने सुने यादों के किस्से है।

मुहब्बत के तरानें तो अभी तुमको सुनाने हैं।।

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Naya Ye Daur Hai Lakin, Wahi Kisse Purane Hai,,

Muhabbat Ke Jamane The, Mubabbat KE Jamane Hai,,

Mere Geeton Me Jo tumne sune yaddon ke kisse hai,

Muhabbat ke tarane to abhi tumko sunane hai,,

Hindi Poet, हिन्दी कवि

—- A poet by heart ———

 A Collection Hindi Poems, Hindi Geet, Poetry, Shayari & Ghazals

by – Vivek Rajpoot, Hindi Poet

 हिन्दी कविताएँ , हिन्दी  गीत, शायरी व गज़लों का संग्रह

 द्वारा – विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

For More Visit – www.vivekrajpoot.com

( विवेक राजपूत द्वारा माध्यम ग्रुप की स्थापना की गयी जिसमें नये और  पुरानें कवियों व शायरों को सम्मिलित करने का एक सफल प्रयास किया। जिससे कवि सम्मेलन व मुशायरों में उनकी प्रस्तुति करायी जा सके,  A group of new and old poets and Shayar created by Vivek Rajpoot successful effort called MADHYAM to give them a chance to perform in Kavi Sammelan and Mushaira )

for more – visit – http://www.vivekrajpoot.com

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तुम्हीं से प्यार करता हूँ, ना जाने मैं भला कब से,, By Hindi Kavi Vivek Rajpoot

प्रेम की कविता का आन्नद ही अलग होता है ॰ ॰ ॰ ॰
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तुम्हीं से प्यार करता हूँ, ना जाने मैं भला कब से,,
ना जीता हूँ ना मरता हूँ,, ना जाने मैं भला कब से,,
कदम रखा है तुमने, जब से इस दहलीज़ पे दिल की,,
उसी एक पल में रहता हूँ, ना जाने मैं भला कब से,,

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Prem Ki Kavita Ka Aanand hi alag hota hai.. (Love Poems)

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Tumhi Se pyar karta hun, Na jane main bhala kab se,

Na Jeeta Hun Na marta hun, Na jane main bhala kab se,,

kadam rakha hai tumne, jab se iss dahleez pe dil ki,

Ussi ek pal me rahata hu, Na jane main Bhala kab se,,

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Hindi poetry, Hindi Poems (हिन्दी कविता)

द्वारा – विवेक राजपूत (हिन्दी कवि)
By – Vivek Rajpoot (Hindi Poet)

Hindi Kavi, हिन्दी कवि

 A Collection Hindi Poems, Hindi Geet, Poetry, Shayari & Ghazals

by – Vivek Rajpoot, Hindi Poet

 हिन्दी कविताएँ , हिन्दी  गीत, शायरी व गज़लों का संग्रह

 द्वारा – विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

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( विवेक राजपूत द्वारा माध्यम ग्रुप की स्थापना की गयी जिसमें नये और  पुरानें कवियों व शायरों को सम्मिलित करने का एक सफल प्रयास किया। जिससे कवि सम्मेलन व मुशायरों में उनकी प्रस्तुति करायी जा सके,  A group of new and old poets and Shayar created by Vivek Rajpoot successful effort called MADHYAM to give them a chance to perform in Kavi Sammelan and Mushaira )

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Happy Holi

होली की कविता, होली का गीत वही होली जो राधा ने श्याम के संग खेली, कभी बरसाने में, कभी वृन्दावन की गलियों में, कभी जमुना तट पे, कभी गोकुल गाँव में और कभी कदम्ब की छाँव में

Holi ki kavita, Geet wohi holi jo kabhi Radha ne Shyam ke sang kheli, kabhi barsane me, kabhi vrindavan ki galiyon me, kabhi jamuna tat pe, kabhi gokul gaon me aur kabhi kadamb ki chaon me

——————————————–

तेरे संग मैने खेली, ‘मेरी कल्पना की होली’।

यही बात मैने अब तक, तुमसे नही है बोली।।

कोई  रंग  ना  बिखेरा,

ना गुलाल ही उडाया।।

सुन्दर   ये  रूप  तेरा,

बस  प्रेम  से  सजाया।।

मेरी कल्पना से निकलो, आजाओ खेलो होली।

यही बात मैने अब तक, तुमसे नही है बोली।।

—————————————————-

Tere Sang Maine khaili meri kalpna ki holi,

yehi baat maine ab tak, tumse nahi hai boli,,

koi rang na bikhera,

na gulal hi udaya,

sunder ye roop tera,

bus prem se sajaya,

Meri kalpna se niklo, aajao khelo holi,,

yehi baat maine ab tak, tumse nahi hai boli

Holi Hindi Song  by Vivek Rajpoot, Hindi Poet

होली गीत – विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

Wish you very happy holi

प्रिये मित्रों,
मैने मेरा एक गीत एक स्कूल के होली दिवस पर गाया था। कुछ मित्रों के आदेश पर उस गीत की कुछ पंक्तियां ‘होली’ के अलग अलग रंगो में डूबी प्रस्तुत हैं।

“मेरी कल्पना की होली”
“Wish you very happy Holi”

By Vivek Rajpoot

होली की कविता, होली का गीत वही होली जो राधा ने श्याम के संग खेली, कभी बरसाने में, कभी वृन्दावन की गलियों में, कभी जमुना तट पे, कभी गोकुल गाँव में और कभी कदम्ब की छाँव में

Holi ki kavita, Geet wohi holi jo kabhi Radha ne Shyam ke sang kheli, kabhi barsane me, kabhi vrindavan ki galiyon me, kabhi jamuna tat pe, kabhi gokul gaon me aur kabhi kadamb ki chaon me

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तेरे संग मैने खेली, ‘मेरी कल्पना की होली’।

यही बात मैने अब तक, तुमसे नही है बोली।।

कोई  रंग  ना  बिखेरा,

ना गुलाल ही उडाया।।

सुन्दर   ये  रूप  तेरा,

बस  प्रेम  से  सजाया।।

मेरी कल्पना से निकलो, आजाओ खेलो होली।

यही बात मैने अब तक, तुमसे नही है बोली।।

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Tere Sang Maine khaili meri kalpna ki holi,

yehi baat maine ab tak, tumse nahi hai boli,,

koi rang na bikhera,

na gulal hi udaya,

sunder ye roop tera,

bus prem se sajaya,

Meri kalpna se niklo, aajao khelo holi,,

yehi baat maine ab tak, tumse nahi hai boli,,

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विवेक राजपूत , हिन्दी कवि , Hindi Kavi, Hindi Poet, Vivek Rajput

 A Collection Hindi Poems, Hindi Geet, Poetry, Shayari & Ghazals

by – Vivek Rajpoot, Hindi Poet

 हिन्दी कविताएँ , हिन्दी  गीत, शायरी व गज़लों का संग्रह

 द्वारा – विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

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( विवेक राजपूत द्वारा माध्यम ग्रुप की स्थापना की गयी जिसमें नये और  पुरानें कवियों व शायरों को सम्मिलित करने का एक सफल प्रयास किया जिससे कवि सम्मेलन व मुशायरों में उनकी प्रस्तुति करायी जा सके,  A group of new and old poets and Shayar created by Vivek Rajpoot successful effort called MADHYAM to give them a chance to perform in Kavi Sammelan and Mushaira )

“मेरी कल्पना की होली” “Wish you very happy Holi”

प्रिये मित्रों,
मैने मेरा एक गीत एक स्कूल के होली दिवस पर गाया था। कुछ मित्रों के आदेश पर उस गीत की कुछ पंक्तियां ‘होली’ के अलग अलग रंगो में डूबी प्रस्तुत हैं।

“मेरी कल्पना की होली”
“Wish you very happy Holi”

By Vivek Rajpoot

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होली की कविता, होली का गीत वही होली जो राधा ने श्याम के संग खेली, कभी बरसाने में, कभी वृन्दावन की गलियों में, कभी जमुना तट पे, कभी गोकुल गाँव में और कभी कदम्ब की छाँव में

Holi ki kavita, Geet wohi holi jo kabhi Radha ne Shyam ke sang kheli, kabhi barsane me, kabhi vrindavan ki galiyon me, kabhi jamuna tat pe, kabhi gokul gaon me aur kabhi kadamb ki chaon me

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तेरे संग मैने खेली, ‘मेरी कल्पना की होली’।

यही बात मैने अब तक, तुमसे नही है बोली।।

कोई  रंग  ना  बिखेरा,

ना गुलाल ही उडाया।।

सुन्दर   ये  रूप  तेरा,

बस  प्रेम  से  सजाया।।

मेरी कल्पना से निकलो, आजाओ खेलो होली।

यही बात मैने अब तक, तुमसे नही है बोली।।

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Tere Sang Maine khaili meri kalpna ki holi,

yehi baat maine ab tak, tumse nahi hai boli,,

koi rang na bikhera,

na gulal hi udaya,

sunder ye roop tera,

bus prem se sajaya,

Meri kalpna se niklo, aajao khelo holi,,

yehi baat maine ab tak, tumse nahi hai boli,,

Hindi Kavita, Geet, Gazal, Shayari by Vivek Rajpoot, Hindi Kavi, Hindi Poet

हिन्दी कविता, गीत, गज़ल, शायरी द्वारा – विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

विवेक राजपूत, हिन्दी कवि, Vivek Rajput, Hindi Poet, Hindi Kavi

फ़िराक़ गोरखपुरी साहब की आज पुण्यतिथि पर उन्हे श्रधान्जलि अर्पित

मित्रों,
फ़िराक़ गोरखपुरी साहब की आज पुण्यतिथि है।
फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय) एक महान एवं प्रसिद्ध रचनाकार , गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में जन्मे और साहित्य अकादमी पुरस्कार (गुले-नग्मा के लिए), ज्ञानपीठ पुरस्कार , पद्म भूषण से सम्मानित का निधन ३ मार्च १९८२ को हुआ था। हम उन्ही की एक बहुत प्रसिद्ध रचना से उन्हे श्रधान्जलि अर्पित करते है।

बहुत पहले से इन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऎ ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं

तबीयत अपनी घबराती है अब सुनसान रातों में
हम एसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं

तुझे घाटा न होने देंगे कार-ओ-बार-ए-उलफ़त में
हम अपने सर तेरा ऎ दोस्त हर नुक़सान लेते हैं

रफ़ीक़-ए-ज़िन्दगी थी अब अनीस-ए-वक़्त-ए-आखिर है
तेरा ऎ मौत! हम ये दूसरा एअहसान लेते हैं

फ़िराक़’ अक्सर बदल कर भेस फिरता है कोई काफ़िर
कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं

by – Vivek Rajpoot, Hindi Poet (Hindi Kavi) विवेक राजपूत, हिन्दी कवि

विवेक राजपूत, हिन्दी कवि, Vivek Rajput, Hindi Kavi, Hindi Poet